तीन तलाक पर सुनवाई का दूसरा दिन, चार सवाल के जवाब चाहिए
तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल
जब मजहब कहता है तीन तलाक गलत है तो फिर कानूनन इसे सही क्यों माना गया ? ।
जो मजहब के हिसाब से पाप है, क्या उसे शरियत के हिसाब से सही मान लें?
क्या निकाहनामे में लिखा हो, तीन तलाक नहीं होगा?
तीन तलाक की शिकार महिलाओं की दलील
सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने तीन तलाक शिकार महिलाओं का पक्ष कोर्ट के सामने रखा। जेठमलानी ने कहा,
तीन तलाक का हक सिर्फ शौहर को क्यों दिया गया, बीवी को क्यों नहीं? ये संविधान से मिले बराबरी के अधिकार का उल्लंघन है। निकाह को एक तरफा खत्म करने का ये घिनौना तरीका है। तीन तलाक एक पाप है। कोई भी कानून इसे इजाजत नहीं दे सकता कि सिर्फ पति के चाहने से तलाक हो। ये लिंग भेद भी है।
सुप्रीम कोर्ट के सलाहकार सलमान खुर्शीद की राय
ट्रिपल तलाक एक पाप है। लेकिन अदालत को इसमें कोई कानून नहीं बनाना चाहिए, इस्लाम में जो तरीके बताए गए उसी से मामले को निपटाना चाहिए। अगर तीन तलाक को एक तलाक कर दें तो 90 फीसदी परेशानी दूर हो जाएगी। जब तीसरी बार तलाक कहा जाता तो वो फाइनल माना जाता है। लेकिन इसके लिए 3 महीने का वक्त होता है,तीन महीने के इद्दत के वक्त पति-पत्नी को साथ आने का मौका मिलना चाहिए…



